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30 मिनट में 25 लोगों का खाना! ‘विश्वगुरु चूल्हा’ बनाने वाले Mohammad Sher Khan की अनोखी कहानी

04 Apr 2026

भारत में बढ़ती LPG समस्या और महंगे गैस सिलेंडर के बीच एक देसी जुगाड़ ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।राजस्थान के एक साधारण कारीगर ने ऐसा अनोखा चूल्हा बनाया है, जो न सिर्फ कम ईंधन में काम कर ताहै बल्कि बेहद कम समय में ज्यादा खाना भी तैयार कर देता है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह ‘विश्वगुरुचूल्हा ‘अब हर जगह चर्चा का विषय बन चुका है।

कौन हैं इस चूल्हे के पीछे का दिमाग?

इस अनोखे आविष्कार के पीछे हैं Mohammad Sher Khan, जो राजस्थान के उदयपुर के रहने वाले हैं। खास बात यह है कि उन्होंने सिर्फ 8वीं तक पढ़ाई की है, लेकिन अपनी मेहनत और अनुभव के दम पर एक ऐसा इनोवेशन कर दिखाया, जो आज लाखों लोगों के लिए उपयोगी साबित हो रहा है। शेर खान पिछले लगभग 25–30 वर्षों से लोहेऔर धातु का काम कर रहे हैं। उन्होंने अपने अनुभव से यह समझा कि गांवोंऔर ढाबों में खाना बनाने में बहुत समय और ईंधन खर्च होता है, और इसी समस्या का समाधान निकालने के लिए उन्होंने इस चूल्हे को तैयार किया।

 क्या है ‘विश्वगुरु चूल्हा’?

‘विश्वगुरुचूल्हा’ एक 3-इन-1 मल्टी-फंक्शनल चूल्हा है, जिसमें एक साथ तीन तरह के काम किए जा सकते हैं:

  • नीचे: दाल, सब्जी यापानी उबालना
  • बीचमें: तलना याग्रिल करना
  • ऊपर: रोटी, बाटी याब्रेड सेकना

इस खास डिजाइन की वजह से एक ही समय में कई डिश तैयार हो जाती हैं और खानाबनाने में लगने वाला समय काफी कम हो जाता है।

यही कारण है कि यह चूल्हा सिर्फ 30 मिनट में करीब 25 लोगों का खाना तैयार कर सकता है। 

LPG संकट में बना वरदान

हाल के समयमें अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण LPG सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे गैस सिलेंडर महंगे और कम उपलब्ध हो गए हैं। 

ऐसे में ‘विश्वगुरुचूल्हा’ एक सस्ता और भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है।यह चूल्हा:

  • कम ईंधन (लगभग 2 किलोलकड़ी) में काम करता है
  • गैस पर निर्भरता कम करता है
  • ग्रामीण और छोटे व्यवसायों के लिए बेहद उपयोगी है

कम धुआं, ज्यादा फायदा

पारंपरिक चूल्हों में जहां ज्यादा धुआं निकलता है, वहीं इस नए चूल्हे मेंधुआं बहुत कम होता है। इससे:

  • महिलाओं और कुक की सेहत बेहतर रहती है
  • पर्यावरण को नुकसान कम होता है
  • लकड़ी की खपत भी काफी घट जाती है

बताया जाता है कि जहां सामान्य चूल्हे में 8–10 किलो लकड़ी लगती है, वहीं यह चूल्हा सिर्फ 2 किलो में कामकर देता है।

 कीमत और बढ़ती मांग

इस चूल्हे की कीमत लगभग ₹6,500 से ₹10,000 के बीच बताई जा रही है, जो इसे आम लोगों के लिए कि फायती बनाती है।

  • अब तक 10,000 से ज्यादा यूनिट बिक चुकेहैं
  • गांव, ढाबा और छोटे होटल में इसकी डिमांड तेजी से बढ़ रही है
  • विदेशों में भी इसकी मांग शुरू हो चुकी है 

 सोशल मीडिया पर वायरल

इस चूल्हे का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक साथ दाल-बाटी औरअन्य खाना बनता दिख रहा है।लोग इस देसी जुगाड़ की जम कर तारीफ कर रहे हैं और इसे “Make in India” का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं।

27 साल की मेहनत का नतीजा

इस चूल्हे को बनाने में Mohammad Sher Khan ने करीब 20–27 साल का समयलगाया। लगातार प्रयोग और सुधार के बाद उन्होंने इसका पेटेंट भी हासिल किया और आज यह उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धिबन चुका है।

सीख क्या मिलतीहै?

यह कहानी हमें सिखाती है कि:

  • बड़ी डिग्री नहीं, बड़ा सोच मायने रखता है
  • समस्या को समझ कर समाधान निकाला जा सकता है
  • देसी जुगाड़ भी वैश्विकस्तर पर पहचान बना सकता है

भारत में बढ़ती LPG समस्या और महंगे गैस सिलेंडर के बीच एक देसी जुगाड़ ने सब का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।राजस्थान के एक साधारण कारीगर ने ऐसाअनोखा चूल्हा बनाया है, जो नसिर्फ कम ईंधन में काम करता है बल्कि बेहद कम समय में ज्यादा खाना भी तैयार कर देता है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह ‘विश्वगुरुचूल्हा ‘अब हर जगह चर्चा का विषय बन चुका है।