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दिल्ली एग्जाम चीटिंग रैकेट 2026: IIT, NIT और DTU छात्रों का नाम सामने, द्वारका फ्लैट से चलता था करोड़ों का स्कैम

14 Apr 2026

भारत में सरकारी और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की अहमियत बहुत अधिक है। हरसाल लाखों छात्र IIT, NIT, SSC, Banking और अन्य प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। लेकिन हाल ही में सामने आए एक बड़े घोटाले ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।दिल्ली पुलिस ने एक बड़े एंट्रेंस एग्जाम चीटिंग रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसमें देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के छात्र भी शामिल पाए गए हैं।

 क्या है पूरामामला?

राजधानी दिल्ली के द्वारका इलाके में स्थित एक फ्लैट से यह हाई-टेकचीटिंग रैकेट चलाया जा रहा था। पुलिस की जांच में सामने आया कि यह रैकेट 10 से अधिक एंट्रेंस परीक्षाओं में नकल कराने का काम करता था।

इस गिरोह में कुल 32 लोगों की पहचान हुई है, जिनमें कुछ छात्र Indian Institutes of Technology, National Institutes of Technology और Delhi Technological University जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े हुए हैं।

 कैसे काम करता था यह चीटिंग रैकेट?

यह कोई साधारणन कल का मामला नहीं था, बल्कि पूरी तरह से संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत नेटवर्क था।

मुख्यतरीका:

  • उम्मीदवारों को पहले से चिन्हित किया जाता था
  • उन्हें खास तरह के ब्लूटूथ डिवाइस और माइक्रोईयर पीस दिए जाते थे
  • परीक्षा के दौरान बाहर बैठे “सॉल्वर” सवालों के जवाब बताते थे
  • फ्लैट को एक कंट्रोल रूम की तरह इस्तेमाल किया जाता था

इस पूरे सिस्टम में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल इस तरह किया गया था कि पकड़ना मुश्किल हो जाता था।

द्वारका फ्लैट बना था कंट्रोल सेंटर

दिल्ली के द्वार कामें एक किराए के फ्लैट को इस रैकेट का मुख्य अड्डा बनाया गया था। यहीं से सभी ऑपरेशनकंट्रोल किए जाते थे।

  • यहां हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्शन लगाया गया था
  • कई लैपटॉप और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस मौजूद थे
  • सॉल्वरटीम यहीं बैठकर रियल टाइम में पेपर हल करती थी

यह फ्लैट एक तरह से “मिनी एग्जामहैकिंग सेंटर” बन चुका था।

करोड़ों का खेल: कैसे कमाए जाते थे पैसे?

इस चीटिंग रैकेट का नेटवर्क केवल तकनीकी ही नहीं बल्कि आर्थिक रूप से भी काफी बड़ा था।

 फीस स्ट्रक्चर:

  • एक उम्मीदवार से ₹5 लाख से₹20 लाख तक लिए जाते थे
  • परीक्षा के स्तर और पोस्ट के हिसाब से रेट तय होता था

इस तरह अनुमान लगाया जा रहा है कि यह पूरा नेटवर्क मल्टी-करोड़ (multi-crore) का कारोबार कर रहा था।

किन-किन परीक्षाओं में फैला था नेटवर्क?

जांच में पता चला है कि यह गिरोह केवल एक या दो परीक्षाओं तक सीमित नहीं था।

 प्रभावित परीक्षाएं:

  • इंजीनियरिंग एंट्रेंस (JEE जैसे)
  • सरकारी नौकरी परीक्षाएं (SSC, Banking)
  • अन्य प्रतियोगी परीक्षाएं

इससे यह साफ होता है कि यह रैकेट लंबे समय से सक्रिय था और बड़े स्तर पर काम कर रहा था।

IIT, NIT और DTU छात्रों की भूमिका

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस गिरोह में शामिल कुछ लोग देश के टॉप इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्र थे।

उनकी भूमिका:

  • ये छात्र “सॉल्वर” के रूप में काम करते थे
  • कठिन प्रश्नों को तेजी से हल करते थे
  • तकनीकी सेट अप संभालते थे

इससे यह सवाल उठता है कि देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के छात्र भी इस तरह के गैर कानूनी काम में क्यों शामिल हो रहे हैं।

पुलिस की कार्रवाई

दिल्ली पुलिस ने इस पूरे मामले में बड़ी कार्रवाई की है।

अब तक की कार्रवाई:

  • 32 लोगों की पहचान
  • कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया
  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए
  • बैंकट्रांजैक्शन की जांच जारी

पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्यलिंक तलाश रही है, जो देश के अन्य हिस्सों में भी हो सकते हैं।

 कैसे हुआ खुलासा?

इस रैकेट का खुलासा एक इनपुट के आधार पर हुआ।पुलिस को पहले से शक था कि कुछ परीक्षाओं में संगठित तरीके से नकल कराई जा रही है।

जांच के दौरान:

  • संदिग्ध उम्मीदवारों पर नजर रखी गई
  • तकनी की उपकरणों का पताल गाया गया
  • अंत में द्वारका फ्लैट पर छापा मारा गया

यहीं से पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।

शिक्षा प्रणाली पर बड़ा सवाल

इस घटना ने भारत की परीक्षा प्रणाली की विश्व सनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 मुख्य चिंताएं:

  • क्या परीक्षाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं?
  • क्या टेक्नो लॉजी का गलत इस्तेमाल बढ़ रहा है?
  • क्या कड़े नियमों की जरूरत है?

सरकार और एजेंसियों के लिए चुनौती

इस तरह के हाई-टेक फ्रॉड को रोकना आसान नहीं है। इसके लिए कई स्तरों पर सुधार की जरूरत है:

जरूरीकदम:

  • परीक्षा केंद्रों पर सख्त जांच
  • इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर पूरी तरह प्रतिबंध
  • AI और टेक्नोलॉजी का इस्तेमालकर निगरानी
  • कड़ेकानून और सजा

छात्रों के लिएसंदेश

यह घटना उन छात्रों के लिए भी एक चेतावनी है जो शॉर्टकटअपनाने की सोचते हैं।

  • नकल से सफलता अस्थायी होती है
  • पकड़े जाने पर करियर पूरी तरह खत्म हो सकता है
  • ईमानदारी से मेहनत ही सही रास्ता है